स्वाध्याय और मनन मानसिक परिष्कार के दो साधन (भाग 1)
Unknown
March 20, 2016
मन बैसाखी गधे की तरह है जिसे नहला धुला देने पर भी मलीनता प्रिय लगती है और दूसरे ही दिन धूलि में लौटकर फिर पहले जैसी गंदगी में लिपट...
स्वाध्याय और मनन मानसिक परिष्कार के दो साधन (भाग 1)
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